हिन्दी ब्लागिंग पर सोमरस ठाकुर की ये कविता सुनिये.

March 19, 2008

सोमरस ठाकुर आगरे से हैं और ब्रम्हांड के सबसे बड़े कवि है उसी तरह जैसे आलोक पुराणिक इस ब्रम्हांड के सबसे बड़े लेखक हैं. प्रतीक पांडे ने बताया है कि आगरा बेलन गंज में ब्रम्हांड नाम का एक पतली सी गली है. हमने कमलेश मदान भाई को कैमरा लेकर जांच के लिये भेजा है. जब तक कमलेश मदान अपनी रपट लिखायें हमें उई-मेल से मिली सोमरस ठाकुर की ये कविता झेलिये.

मेरे हिन्दी ब्लागिंग में है, बड़े धुरन्धर वीर,
सौ सौ नमन करू मैं भईया सौ सौ नमन करूं

बुड़बकई टिड़बकई अजदक, मधुर मधुर कछु गामें,
शिवकुमार दुरयोधनजी की यादें हमें सुनामें
गैया छोड़ कह रहे नीरज मूरखता के दोहे,
मुंह में जमना भरे; निशा जब परसे गाजर खीर;
सौ सौ नमन करू मैं भईया सौ सौ नमन करूं

अजित जीत शबदन की नगरी में फर्रायें झंडा,
यहां द्विवेदी जी फटकारें, कापीराइट डंडा
अमरीकी फंडा की व्याख्या करें सुरेश जतन ते
हिन्दुस्तानी अनिल हंस बन परखें नीर औ क्षीर
सौ सौ नमन करू मैं भईया सौ सौ नमन करूं

दूर हिन्द से लिये हिन्दिनी बिलगाये ई-स्वामी,
गुपचुप रचना संरचना रत में श्री रवि रतलामी
वाहमनी में मालदार बैठे बिनु कपड़ा लत्ता,
किस्सागोई कमसिन यादें भरें हृदय में पीर,
सौ सौ नमन करू मैं भईया सौ सौ नमन करूं;

होली में भी होमवर्क को मास्साब क्यों जांचें;
छोड़ रेडियो उल्लू के गुन ममता जी अब बांचें;
तज कविताई परम्परा कौ ज्ञान सहेजें पंकज;
विस्फोटी बातन ते संजय भिड़ा रहे तदबीर
सौ सौ नमन करू मैं भईया सौ सौ नमन करूं

सागर नाहर की दस्तक महफिल में बाजे हरदम,
हृदय गवाक्ष, मीत मन झांके यहा मनीषी सरगम
रफी गा रहे इंगलिश गाने घुस कबाड़खाने में
हाय विमल की ठुमरी सुनकर मनवा भयो अधीर,
सौ सौ नमन करू मैं भईया सौ सौ नमन करूं

अर्श फर्श पे पटका मारें तरुण निठल्लौ चिन्तन,
चंद औरतों के खुतूत कूं शोध रह्यो लिंकित मन
बोधिसत्व आभा कौ मानस समझें मां की चुप्पी
हथरिक्शा की सुनें विदाई, बरसे अन्तस: नीर;
सौ सौ नमन करू मैं भईया सौ सौ नमन करूं;

एसो जतन करौ कछु भईया, बजै हमारौ डंका
हिन्दुस्तानी सटका डारें, इन्टरनेटी लंका.
होरी में रंग तो बरसे; कम लसे नेह अन्तर से
आज कैंकड़ापन्ती मन पै घाव करै गंभीर
सौ सौ नमन करू मैं भईया सौ सौ नमन करूं

Entry Filed under: लल्लूपना. .

12 Comments Add your own

  • 1. ashish maharishi  |  March 19, 2008 at 10:11 am

    वाकई सबसे बड़े कवि की सबसे बड़ी रचना है यह

  • 2. kakesh  |  March 19, 2008 at 10:28 am

    सचमुच सबसे बड़े कवि हैं जी. वाह वाह लल्लू जी.

  • 3. अनिल रघुराज  |  March 19, 2008 at 2:25 pm

    लगता है बड़े जतन और मेहनत से लिखी गई है यह कविता। एक पोस्ट में सभी ब्लॉगरों को भर दिया। क्या बात है!!!

  • 4. ravindra prabhat  |  March 19, 2008 at 2:47 pm

    बहुत बढिया है जी , बधाई स्वीकारें !

  • 5. visfot  |  March 19, 2008 at 3:04 pm

    सही बात. एक कविता में इतने ब्लागरों को उनकी परिभाषा के साथ समेट लेना. काबिले तारीफ.

  • 6. अनूप शुक्ल  |  March 20, 2008 at 2:16 am

    धांसू है। मौज है। :)

  • 7. समीर लाल  |  March 20, 2008 at 4:54 am

    बढ़िया होली की मस्ती छानी जा रही है..बहुत खूब. :)

  • 8. arun  |  March 20, 2008 at 7:29 am

    होली पर इतनी भी ना छाने कि हम से पंगा ले बैठे

  • 9. Shiv Kumar Mishra  |  March 20, 2008 at 9:45 am

    वाह! वाह! बहुत धाँसू कविता है….ब्रह्माण्ड के सबसे अच्छे कवि. वैसे सुना है कि आलोक जी भी पहले आगरा में ही रहते थे. वे भी क्या ब्रह्माण्ड गली में ही….

  • 10. सागर नाहर  |  March 20, 2008 at 10:23 am

    इस तरह पहले भी बहुत सी कवितायें लिखी गई थी परन्तु सबसे बेहतरीन कविताओं( गीतों) में से एक यह है.. बहुत मेहनत की होगी आपने समझा जा सकता है।
    बधाइ स्वीकार करें और हाँ होली की शुभकामनायें भी।
    :)

  • 11. Pratik Pandey  |  March 21, 2008 at 7:51 pm

    आगरे के ब्लॉग मण्डल में यह नया सितारा कौन है???

  • 12. अजित वडनेरकर  |  April 12, 2008 at 3:58 pm

    इस कबित्त पर तो यही कह सकता हूं-
    सौ सौ नमन करूं मैं भैया , सौ सौ नमन करूं

Leave a Comment

Required

Required, hidden

Some HTML allowed:
<a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>

Trackback this post  |  Subscribe to the comments via RSS Feed


Indinator by Blogvani.com

Categories

Recent Posts

झप्पाझप

Category Cloud

दिल हुम हुम करे बात पुरानी है लल्लूपना

Links

Tags