आगरे के अखबार

March 24, 2008

हीरानन्द सच्चिदानन्द वात्सायन अज्ञेय की पत्रकारिता को को आप दिनमान से जानते हैं. लेकिन क्या आप बता सकते हैं अज्ञेय आगरे के किस अखबार से जुड़े रहे थे?

वो कौन सा अखबार था जिसके जवाहरलाल नेहरू, आचार्य जेबी कृपलानी जैसी हस्तियां मात्र संवाददाता के तौर पर जुड़ी हुईं थीं?

उस अखबार का नाम था सैनिक और ये अखबार आगरे से निकला करता था. इसे पंडित कृष्णदत्त पालीवाल अपने जुझारू तेवरों से निकाला करते थे. आजादी की लड़ाई में पंडित कृष्णदत्त पालीवाल कई बार जेल गये. सैनिक की प्रेस जब्त हुई लेकिन अखबार बंद होकर निकलता रहा. इसका संपादकीय पन्ने पर लिखा रहता था
कमर बांध कर अमर समर में नाम करेंगे
सैनिक हैं हम विजय स्वत्व संग्राम करेंगे.

आजादी मिलने तक तो ये अखबार बुलंदियों पर रहा लेकिन जब आजादी मिली तो पंडित कृष्णदत्त पालीवाल कांग्रेसी होने के कारण सत्ता में शामिल हो गये और सैनिक ने अपनी जुझारूपन खो दिया. और ये अखबार इतिहास के पन्नों में समा गया.

उजाला
उजाला सैनिक की टक्कर का अखबार था और इसे आगरे से गणपत चंद्र केला निकालते थे. ये आगरे का सबसे विश्वसनीय अखबार माना जाता था. सैनिक जहां राष्ट्रीय़ समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करता था, उजाला स्थानीय मुद्दे भी उठाया करता था. अमर उजाला की शुरूआत करने वाले डोरीलाल अग्रवाल भी इसी अखबार में काम करते थे. सिर्फ डोरीलाल अग्रवाल ही नहीं उनके पिताजी भी इसी अखबार मे काम करते थे. बाद मे डोरीलाल अग्रवाल और कैला परिवार में कुछ विवाद हुआ और डोरीलाल अग्रवाल ने अमर उजाला की शुरूआत की.

अमर उजाला
अमर उजाला की शुरूआत डोरीलाल अग्रवाल और मुरारीलाल माहेश्वरी ने मिलकर की थी. डोरीलाल अग्रवाल ने अपने उजाला के अनुभव यहा दोहराये यानी राष्ट्रीय बातों के साथ साथ स्थानीय बाते भी उतनी प्रमुखता से उठाना. देखते ही देखते अमर उजाला, उजाला से आगे निकल गया और थोड़े दिन बाद इसने सैनिक को भी पीछे छोड़ कर आगरे का सर्वप्रमुख अखबार बन गया.

आज का हंगामा
आगरे में इन सब अखबारों के अतिरिक्त एक और अखबार था इसका नाम था आज का हंगामा. इसका मुख्य विक्रय बिन्दु (USP) था रोचक फीचर सामग्री और ब्रेकिग न्यूज. ये रोचक फीचर सामग्री और ब्रेकिग न्यूज को अपनी सुर्खियों में पेश करता था और अपनी सुर्खियों की वजह से ही बिक जाया करता था. सैनिक और उजाला अखबार जहां सुबह के अखबार थे आज का हंगामा सुबह से लेकर शाम तक बिकता रहता था. आज के हंगामा के अधिक लोकप्रिय न होने के कारण ये था कि इस तरह के अखबार में ग्राफिक्स अधिक होने चाहिये थे लेकिन उस समय ग्राफिक्स पेश करने की तकनीक उन्नत नहीं थी.

आगरे के इन तीनों अखबारों में आज की पत्रकारिता के मूल मंत्र समाये हुये थे जुझारूपन, स्थानीय मुद्दे और रोचक फीचर सामग्री व ब्रेकिंग न्यूज.

लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि आजके अखबारों से जुझारूपन एकदम गायब हो गया है?

Agra Newspapers, AAj ka Hungama, Agra Journalism, Amar Ujala, Dori Lal Agarwal, Ganpati Chandra Kela, Krishna Dutt Paliwal, Murari Lal Maheshwari, Sainik, Ujala

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2 Comments Add your own

  • 1. प्रियंकर  |  March 24, 2008 at 7:00 am

    ‘सैनिक’ और पंडित कृष्णदत्त पालीवाल के बारे में और विस्तार से लिखा जाना चाहिए .

  • 2. Pratik Pandey  |  March 29, 2008 at 4:12 pm

    आगरे के अख़बारों के बारे में इतने रोचक तरीक़े से जानकारी देने के लिए शुक्रिया। अगली पोस्ट का इंतज़ार है…

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