आओ आओ आमिर खान, मूर्ख बनाओ आमिर खान

April 17, 2008

आओ आओ आमिर खान
टार्च उठाओ आमिर खान
नाच दिखाओ आमिर खान
मूर्ख बनाओ आमिर खान

बड़े ब्रांड की दूकानों के
आगे देखो खड़े शिखंडी
बातों से हम बहल जायेंगे
बात बनाओ, ओ पाखंडी

ब्रांड राजदूतों को देखो
पैसौं के लालच में आकर
कुत्ते जैसे हांफ रहे है
पूछ हिलाते, टार्च उठाकर

तिब्बत वाले, मूरख साले
कल मरते तो अब मर जायें
हम तो खुश हैं, हमें पड़ी क्या
चीनी इसे गप्प कर जायें.

बन्द करो इन्डिया गेट को
विजय चौक पर ताले डालो
मुश्कें कस कर मानवता की
आओ अपनी टार्च निकालो

मेरा क्या मैं तो लल्लू हूं
तुम तो चालू रखो दुकान
जाय  भाड में  हिन्दुस्तान
आओ आओ आमिर खान

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13 Comments Add your own

  • 1. suresh chiplunkar  |  April 17, 2008 at 1:26 pm

    बहुत बढ़िया लिखा है साहब मजा आ गया, आमिर खान जैसे ढोंगियों को ऐसे ही लतियाना चाहिये। कोकाकोला के बिके हुए भांड हैं ये लोग…

  • 2. Ghost Buster  |  April 17, 2008 at 2:09 pm

    आमिर खान और सैफ अली खान जैसे नचैयों को ओलिम्पिक टॉर्च रिले में शामिल करने का कारण यही है कि कोका कोला और लेनोवो इस ओलिम्पिक के ओफिशिअल स्पोंसर्स हैं जिनके ये ब्रांड एम्बेसेडर हैं. अब ऐसे लोगों के रिले में शामिल होने से इस रिले आयोजन का मूल औचित्य ही प्रश्न-चिन्ह पा जाता है.

    कमेंट्स का फौंट साइज बढाइये. पढने में दिक्कत हो रही है.

  • 3. देव प्रकाश चौधरी  |  April 17, 2008 at 2:49 pm

    अच्छा लिखा है आपने। बधाई

  • 4. visfot  |  April 17, 2008 at 2:49 pm

    बड़ी टाईट कविता कर दिये हैं लल्लू जी.

  • 5. visfot  |  April 17, 2008 at 2:51 pm

    दोबारा कहता हूं कविता बहुत अच्छी है, इसे मैं उड़ाऊंगा बताइये क्या नाम से लिखूं?

  • 6. lalloo  |  April 17, 2008 at 2:58 pm

    सुरेश जी, बिल्कुल सही, ढोंगी ही हैं ये सब.

    भूत बाबू, फोन्ट बढ़ाना तो आता नहीं है. थीम ही बदल डाली है.

    देव प्रकाश जी, आज राजघाट पर तिब्बातियों के चेहरे देखकर मेरे जैसा अशक्त आदमी अपने दर्द का बयां और कैसे करे.

    विस्फोट जी, नाम में क्या रखा है? मैं तो लल्लू ही हूं.

  • 7. bhuvnesh  |  April 17, 2008 at 4:56 pm

    आमिर खान जैसों की बहुत सही धुलाई की है आपने
    ….

    अच्‍छा लगा
    ये वाकई में भांड हैं पैसा मिलने पर टार्च रिले में नंगे होकर भी दौ‍ड़ेंगे

  • 8. ghughutibasuti  |  April 17, 2008 at 7:40 pm

    गजब की कविता है ! वैसे कोई एक टॉर्च ढोने के करोड़ों दे, चाहे आज दे या कल दिये के बदले ढुआए या कल दे तो क्या सच में मना कर दोगे ?
    घुघूती बासूती

  • 9. arun  |  April 18, 2008 at 3:27 am

    अरे साहब क्या कह रहे है,ये सब तो कल दिन भर गर्व करते रहे कि कम से कम एक दिन तो दिल्ली चीनीयो के कब्जे मे रही
    वाम पंथियो के साथ इनका भी सपना साकार हुआ जी वरना दिल्ली मे हमारी सरकार इतनी पंगु की दिल्ली मे सुरक्षा के लिये चीनी राजदूत को अधिकार दे डाले चीनी सुरक्षा गार्ड के भरोसे आई थी मशाल इन गधो ने सारी इज्जत मट्टी मे मिलाय दी.. :)

  • 10. Prashant Priyadarshi  |  April 18, 2008 at 11:20 am

    मैं भी इसे उड़ाने के चक्कर में हूं.. कोई कापीराईट वाला चक्कर तो नहीं है ना?
    अपना नाम भी बताते जायें.. जानने को इच्छुक हूं..

  • 11. parth  |  April 18, 2008 at 11:21 am

    hi,
    it was an excellent write up.I can say this is an innocent reaction of all comman man of India.
    thanks again . go ahead, u will be voice of comman men .
    parth

  • 12. sudarshansingh  |  April 18, 2008 at 11:24 am

    pura desh in nakli heron par mar rahe hain bhai . chwanni ki charity kar ye log shoshiton, vanchiton ke beech khade hoker ghadiyali ansoo bahate hain . apne mitra mandali dhan kuberona ki rakhail media me khud ko aur unke khaoo piyu tatha vilasita ke utpadon ko bechane ke upkramme shamil rahaten hain.

  • 13. shubhashishpandey  |  April 18, 2008 at 12:08 pm

    sahi hai guru :)

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