थोड़े से गदहों की खातिर परेशान हैं क्यों माता जी;
July 13, 2008 at 5:15 am | In लल्लूपना | 1 CommentTags: pangebaj
कल पंगेबाज जी ने एक राजनीतिक हस्ती द्वारा दूसरे राजनीतिक हस्ती के पास अपने गधे भाग जाने की शिकायत करते हुये लिखी एक चिठ्ठी लीक की थी. दूसरे राजनीतिक ने इस चिठ्ठी को अपने संकटमोचन को दे दिया था. संकटमोचन जी ने भी इस चिठ्ठी का जबाब एक कविता में दिया है. लीजिये इस चिठ्ठी से कुछ अंश.
थोड़े से गदहों की खातिर परेशान हैं क्यों माता जी.
गदहे बैठे हैं मंडी में, जाकर के पईसा फैंकेगे.
सारे गदहे छोड दुलत्ती, बात हमारी पर रेंकेगें.
प्रांत प्रांत से, किसिम किसिम के, सारे गदहे लाकर दूगां;
गंदा है पर धंधा है ये, दो परसेन्ट दलाली लूंगा
मनमोहन को धता बताओ, इन्हें नहीं कुछ भी आता जी
थोड़े से गदहों की खातिर परेशान हैं क्यों माता जी;
बुरे वक्त संगी हूं मैं, सबकी बिगड़ी बात बनाता
अमित अनिल से पूछो मैय्या, और मुझे क्या आता जाता
फिलिम नगरिया, बिजनिस बाजी, बना रहे मेरा याराना
इच्चक दाना, बिच्चक दाना, राजनीति का रेवड़खाना
क्लिंटन भाभी, बुश ओबामा, सबसे है मेरा नाता जी
थोड़े से गदहों की खातिर परेशान हैं क्यों माता जी.
1 Comment »
RSS feed for comments on this post. TrackBack URI
Leave a comment
Blog at WordPress.com. | Theme: Pool by Borja Fernandez.
Entries and comments feeds.


sahi hai. jari rhe.
Comment by Advocate Rashmi saurana — July 13, 2008 #