हीरानन्द सच्चिदानन्द वात्सायन अज्ञेय की पत्रकारिता को को आप दिनमान से जानते हैं. लेकिन क्या आप बता सकते हैं अज्ञेय आगरे के किस अखबार से जुड़े रहे थे?
वो कौन सा अखबार था जिसके जवाहरलाल नेहरू, आचार्य जेबी कृपलानी जैसी हस्तियां मात्र संवाददाता के तौर पर जुड़ी हुईं थीं? (more…)
March 24, 2008
तुर्रा और कलंगी, चंग बजाकर मनमौजी गाने वालों के दो समूह होते थे. ये दोनों समूहों के लोग एक दूसरे की लिखे हुये से अपने लिखे को भिड़ाते गाते थे.
तुर्रा और कलंगी की शुरूआत आगरे से हुई. जनकवि शायर नज़ीर अकबराबादी ने अबध की इश्क-मुश्किया शायरी या दिल्ली की सूफी प्रेम विरह शायरी के विपरीत आम आदमी पर लिखा, गाया, गवाया और बजबाया. नज़ीर साहब ने बाजरे की रोटी, तिल के लड्डू, तैराकी, रीछ के बच्चे से लेकर ककड़ियों तक पर लिखा. आम आदमी के लिखे के दीवाने तो आम आदमी ही होने थे. यही थे नज़ीर साहब के असली चेले चपाटे. (more…)
January 10, 2008