Posts filed under 'लल्लूपना'

थोड़े से गदहों की खातिर परेशान हैं क्यों माता जी;

कल पंगेबाज जी ने एक राजनीतिक हस्ती द्वारा दूसरे राजनीतिक हस्ती के पास अपने गधे भाग जाने की शिकायत करते हुये लिखी एक चिठ्ठी लीक की थी.  दूसरे राजनीतिक ने इस चिठ्ठी को अपने संकटमोचन को दे दिया था.  संकटमोचन जी ने भी इस चिठ्ठी का जबाब एक कविता में दिया है.  लीजिये इस चिठ्ठी से कुछ अंश.

थोड़े से गदहों की खातिर परेशान हैं क्यों माता जी.
गदहे बैठे हैं मंडी में, जाकर के पईसा फैंकेगे.
सारे गदहे छोड दुलत्ती, बात हमारी पर रेंकेगें.
प्रांत प्रांत से, किसिम किसिम के, सारे गदहे लाकर दूगां;
गंदा है पर धंधा है ये, दो परसेन्ट दलाली लूंगा
मनमोहन को धता बताओ, इन्हें नहीं कुछ भी आता जी
थोड़े से गदहों की खातिर परेशान हैं क्यों माता जी;

बुरे वक्त संगी हूं मैं, सबकी बिगड़ी बात बनाता
अमित अनिल से पूछो मैय्या, और मुझे क्या आता जाता
फिलिम नगरिया, बिजनिस बाजी, बना रहे मेरा याराना
इच्चक दाना, बिच्चक दाना, राजनीति का रेवड़खाना
चन्दामामा, बुश ओबामा,   सबसे है मेरा नाता जी
थोड़े से गदहों की खातिर परेशान हैं क्यों माता जी.


1 comment July 13, 2008

आओ आओ आमिर खान, मूर्ख बनाओ आमिर खान

आओ आओ आमिर खान
टार्च उठाओ आमिर खान
नाच दिखाओ आमिर खान
मूर्ख बनाओ आमिर खान

बड़े ब्रांड की दूकानों के
आगे देखो खड़े शिखंडी
बातों से हम बहल जायेंगे
बात बनाओ, ओ पाखंडी

ब्रांड राजदूतों को देखो
पैसौं के लालच में आकर
कुत्ते जैसे हांफ रहे है
पूछ हिलाते, टार्च उठाकर

तिब्बत वाले, मूरख साले
कल मरते तो अब मर जायें
हम तो खुश हैं, हमें पड़ी क्या
चीनी इसे गप्प कर जायें.

बन्द करो इन्डिया गेट को
विजय चौक पर ताले डालो
मुश्कें कस कर मानवता की
आओ अपनी टार्च निकालो

मेरा क्या मैं तो लल्लू हूं
तुम तो चालू रखो दुकान
जाय  भाड में  हिन्दुस्तान
आओ आओ आमिर खान


13 comments April 17, 2008

हिन्दी ब्लागिंग पर सोमरस ठाकुर की ये कविता सुनिये.

सोमरस ठाकुर आगरे से हैं और ब्रम्हांड के सबसे बड़े कवि है उसी तरह जैसे आलोक पुराणिक इस ब्रम्हांड के सबसे बड़े लेखक हैं. (more…)


12 comments March 19, 2008


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